मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिला पुलिस एवं आईटीबीपी फोर्स के द्वारा विशेष प्रयास से दोनों आटोमेटिक हथियार भरी हुई मैगजीन के साथ बरामद कर अग्रिम कानूनी कार्यवाही की जा रही है।

जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी

 

दिनांक

 

30/03/2026″

 

 

डेडलाइन से पहले माओवादियों के हथियारों का जखीरा बरामद

 

एक AK-47, एक INSAS रायफल मैगजीन सहित 46 जिंदा कारतूस बरामद

 

31 मार्च के पहले जिला मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी नक्सल मुक्त

 

जिला पुलिस के द्वारा नक्सल विरोधी अभियान के तहत माओवादियों के पूरे ईको सिस्टम को ध्वस्त करने के लिए पुलिस से लूटे हथियारों की जप्ती के प्रयास जारी है। इसी कड़ी में राजनांदगांव रेंज पुलिस महानिरीक्षक बालाजी राव सोमावार (भापुसे) के निर्देशन एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह (भापुसे) के नेतृत्व में एक और सफलता मिली है।

 

आज दिनाक 30-03-2026 को मुखबीर से प्राप्त सूचना पर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह (भापुसे) के नेतृत्व में जिला पुलिस, डीआरजी एवं आईटीबीपी फोर्स जिला कांकेर थाना कोडेकुरसे सीमा क्षेत्र गाँव कोवाचीटोला एवं थाना मदनवाड़ा के कलवर जगल में नक्सलियों द्वारा छुपाए गए डंप की सर्चिग के लिए रवाना हुई थी।

 

तकरीबन 4-5 घंटों की सघन सर्चिग के बाद टेकरी पर स्थित नाला किनारे कटे हुए पेड़ के नीचे काले पालिथीन में लपेटी हुई एक बड़ी बंडल मिली। जिसे सावधानी पूर्वक हटाकर चेक करने पर काले पालिथीन मे लपेटी हुई दो आटोमेटिक हथियार मैगजीन के साथ बरामद की गई।

 

जिला पुलिस एवं आईटीबीपी फोर्स के द्वारा विशेष प्रयास से दोनों आटोमेटिक हथियार भरी हुई मैगजीन के साथ बरामद कर अग्रिम कानूनी कार्यवाही की जा रही है।

 

बरामद हथियारों का विवरण

 

1. आटोमेटिक रायफल AK-47 मय मैगजीन 26 राउंड

 

2. सेमी आटोमेटिक रायफल INSAS मय मैगजीन 20 राउंड

 

जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी में वर्ष 1985 के आसपास थाना औधी क्षेत्र में माओवादियों का प्रवेश हुआ और बस्तर क्षेत्र से सटे होने के कारण इस क्षेत्र में आधार बनाना शुरू किए। नक्सली महाराष्ट्र और छग

 

सीमा के गांवों में जाकर ग्रामीणों से मिलना और नक्सली विचारधारा का प्रचार प्रसार लगातार कर रहे थे। नक्सलियों ने 41 वर्षों में कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दी है।

 

माओवादी संगठन के द्वारा इस क्षेत्र का नामकरण मानपुर डिवीजन किया गया और आंध्रप्रदेश से आए केन्द्रीय सदस्य माओवादी श्रीकांत उर्फ सुकान्त ने वर्ष 2003 मे मानपुर डिवीजन का विस्तृत सर्वे कराकर हथियार बंद दस्ता की शुरुआत किया।

 

2009-2010 वर्ष के दौरान दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के अंतर्गत मानपुर डिवीजन अतर्गत 4 एरिया कमेटी सक्रिय थे। इन 4 चारो एरिया कमेटी के भीतर 7 लोकल ऑर्गेनाइजेशन स्क्वाड, 2 लोकल गुरिल्ला स्क्वाड एवं एक प्लाटून सक्रिय थे।

 

वर्ष 2009 में शहीद विनोद चौबे तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव सहित 29 जवानों के शहादत के समय मानपुर क्षेत्र में केन्द्रीय सशस्त्र बलों की नियुक्ति की गई। जिला पुलिस और केन्द्रीय सशस्त्र बल के सयुक्त अभियानों से माओवादी बैकफूट पर आए।

 

जिला में चलाए गए नक्सल विरोध अभियान में 18 नक्सली अभी तक ढेर किए गए। 33 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हुए।

 

सितबर वर्ष 2012 में आयोजित माओवादी सगठन के मानपुर डिवीजन के दुसरे प्लिनम द्वारा पारित प्रावधान अनुसार मानपुर डिवीजन का नाम परिवर्तन कर राजनांदगांव-काकेर बार्डर डिवीजन नाम रखा गया।

 

सितंबर 2022 की स्थिति में नवीन जिला बनने के समय माओवादी संगठन में केवल 2 एरिया कमेटी और 2 लोकल ऑर्गेनाइजेशन स्क्वाड सक्रिय थे। जो आज दिनांक की स्थिति में निरंक है।

 

इस जिले से माओवादी सगठन में भर्ती हुए सभी जिला मूल निवासी आत्मसमर्पण कर चुके है या फिर किसी पुलिस नक्सली मुठभेड़ में मारे जा चुके है। साथ ही बस्तर या किसी अन्य क्षेत्र के निवासी नक्सली इस जिले में सक्रिय नहीं है।

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